तलब आखिरी...
दिसंबर 30, 2023
जाते हुए साल की आखिरी तलब जो होगी वही आने वाले साल की ज़रूरत कहलाएगी ज़रूरत हद में रखिए अपनी ये आपके अपने हाथ में है वर…
काव्याक्षरा
दिसंबर 30, 2023
जाते हुए साल की आखिरी तलब जो होगी वही आने वाले साल की ज़रूरत कहलाएगी ज़रूरत हद में रखिए अपनी ये आपके अपने हाथ में है वर…
काव्याक्षरा
दिसंबर 27, 2023
लिखे जाने से पहले शब्दों को 'कल्पना' और लिखे जाने के बाद भावार्थ को 'कविता' कहते हैं... ✍️ #kavya…
काव्याक्षरा
दिसंबर 27, 2023
सुख दुख को परिभाषित करना अर्थहीन है जो स्थिति स्वीकार ले मन सुख के अधीन है... न धन की महती भूमिका न साधन प्रवीण ह…
काव्याक्षरा
दिसंबर 27, 2023
कल जो आने वाला है चाहे पर्दा नशीन है पर मुतमईन हैं हम पूरा यकीन है हमारे साथ होंगे तुम तुम्हारे साथ होंगे हम और भ…
काव्याक्षरा
दिसंबर 25, 2023
हम जब छोटे बच्चे थे दिल खोलके हँसते थे खिलखिलाते रहते थे तो फूल झरते थे लोग तो तब भी चिढ़ते थे "इतना क्या हँसना त…
काव्याक्षरा
दिसंबर 25, 2023
तुम चुप बैठे रहोगे फासला बढ़ता जाएगा उपेक्षा करते रहोगे यकीन छूट जाएगा देखकर चले जाओगे क्या दिल भूल पाएगा नज़र न आना चा…
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2023
अगर अवसर मिले उनसे दिल की बात कहने का फिर से तो ये अवसर भी गँवा दीजिए छोड़िए भी ! आगे की सुध लीजिए..✍️ …
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2023
कब तक रहा जा सकता है तुम्हारे प्रेमपगे शब्दों से दूर तुम्हारे हृदय की अनुभूतियाँ और कुछ मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ पर्या…
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2023
कितनी गहरी संवेदनाएँ रखा करती हैं कविताएँ कथ्य वही प्रस्तुति अनेक लोग भिन्न अनुभूति एक... #kavyakshra
काव्याक्षरा
दिसंबर 18, 2023
चाहे तुम्हारा संदेश आए या आहट धड़कनें बेसाख्ता तेज़ हो जाती हैं जब #इंतज़ार होता है तुम्हारा तय रफ़्तार भी थम-सी जाती ह…
काव्याक्षरा
दिसंबर 14, 2023
मेरे श्रीमान जी की सुलझी हुई एक दृष्टि मुझे हर बार अनेक उलझनों से मुक्त रखती है मेरे सोचने भर की देर होती है कि तमाम उ…
काव्याक्षरा
दिसंबर 14, 2023
जिससे खाया नहीं जाता मेरे भूखे रहने पर मुझे ब्याहा गया है एक ऐसे सुपात्र से समर्पण देख चुकी हूंँ मैं प्रेम में जितना चा…
काव्याक्षरा
दिसंबर 12, 2023
रात के सन्नाटे में घड़ी की टिकटिक हो चाहे धड़कते हृदय की धकधक समय नहीं रुकेगा लेकिन किसी दिन घड़ी की गति रुक जाएगी प…
काव्याक्षरा
दिसंबर 12, 2023
जन्मों से थके इश्क को तुम्हारा साथ चाहिए जीभर के तसल्ली से जिसमें बिछड़ने का कोई रिवाज़ न हो न हो नाराज़गी के लम्हे गर…