मुख्यपृष्ठ दृष्टि... दृष्टि... Author - काव्याक्षरा दिसंबर 14, 2023 0 मेरे श्रीमान जी कीसुलझी हुई एक दृष्टिमुझे हर बार अनेक उलझनों से मुक्त रखती हैमेरे सोचने भर की देर होती हैकि तमाम उलझनेंउनके हृदय से गुजरकर मेरे लिए खुद सुलझती हैं...✍️#kavyakshra Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने