ज़िंदगी और मैं....
अप्रैल 18, 2024
काव्याक्षरा
अप्रैल 18, 2024
काव्याक्षरा
अप्रैल 15, 2024
अथाह आसमान हो सोच की उड़ान हो पंख विचारों के खुलें मन का-सा जहान हो शब्दों के ब्रह्मांड में अर्थ की पहचान हो अभिव्यक्…
काव्याक्षरा
मार्च 09, 2024
प्रचलित रहे कथानकों पर व्याख्यान अनेक होते हैं समाप्त हो चुके आख्यानों पर मौन छाया रहता है... 🖋️📖 #kavyakshra
काव्याक्षरा
मार्च 07, 2024
#वैश्विक_स्त्री_दिवस_की_शुभकामनाएँ कोई समझे या न भी समझे मान दे या न भी दे आस्था का शक्तिपुंज एकमात्र स्त्…
काव्याक्षरा
मार्च 06, 2024
जब अँधेरों को उनकी सीमा तक देख लेंगे तो प्रभात की रश्मियों का आलिंगन प्राप्त होगा.... 🎭
काव्याक्षरा
मार्च 02, 2024
उनके अधूरे ख्याल उनकी अधूरी चाहत उनसे अधूरी मुलाकातें... क्या ज़िंदगी को तुम्हारी मुकम्मल कर सकती हैं ऐसी अधूरी बातें…
काव्याक्षरा
मार्च 02, 2024
जब भी अपनी खासियतों की सूची पर इतराना चाहा सब की सब थी खामियाँ थी खासियत कोई नहीं.... 🦨