#प्रणय
दिसंबर 21, 2020
विवश कहाँ है चंद्रमा आबद्ध है परिक्रमण में कौन जाने धरा से कब शपथ ली प्रणय में... #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2020
विवश कहाँ है चंद्रमा आबद्ध है परिक्रमण में कौन जाने धरा से कब शपथ ली प्रणय में... #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2020
इश्क की आग में जलकर रोशन हो नहीं सकते ये दीया वो है जो बाती बगैर दिन रात जलता है... #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
***प्रेम में प्रतीक्षा का सर्वाधिक वर्चस्व है प्रतीक्षा में मिलन के प्रेम ही सर्वस्व है*** #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
प्रतीक्षा में अंत की जीवन ही दुबारा मिला मुक्ति नहीं थी संभव यूँ जीवन के मोहपाश से जब मृत्यु को चाहा हमने जीवन ही उपहार…
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
न जाने किस दिन खिलकर आएगी स्नेह की ऊष्मा लिए धूप... मेरे हिस्से की धुंध को पिघलाकर ले जाएगी वो एक कतरा धूप... #क…
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
स्वामित्व उसने पुरुषों का यूँ ही नहीं स्वीकार किया! सदियों के षड़यंत्र का परिणाम बनी यह स्त्री.. #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
गुनगुनी-सी धूप उतर आएगी भीतर ऊष्मित होने लगेंगे जड़ हुए विचार पिघलने लगेगी दर्प की रेखाएँ तप्त में स्नेह है दिसंबर की …