भूलना मुमकिन कहाँ है....
जून 08, 2024
जो भी सोचते हैं रोज़ भूल जाएँगे उनको मगर खुद को ही ये बात बताना भूल जाते हैं... कवायद करते हैं वो लोग उम्रभर ऐसे ही अक्…
काव्याक्षरा
जून 08, 2024
जो भी सोचते हैं रोज़ भूल जाएँगे उनको मगर खुद को ही ये बात बताना भूल जाते हैं... कवायद करते हैं वो लोग उम्रभर ऐसे ही अक्…
काव्याक्षरा
जून 08, 2024
घंटों घूरते हैं लोग किसी मुसकराते चेहरे को तब भी यकीन नहीं कि वे मुस्करा पाएँगे.... सोचते हैं काश! कोई खुश…
काव्याक्षरा
जून 07, 2024
बात के जिस हिस्से पर आप मुस्करा देते हैं बस उतनी ही बात सुंदर है! ✍️
काव्याक्षरा
जून 07, 2024
व्यंग्य बाण चलाना एक कला है उसे सुनकर भी न समझने का अभिनय करना कला में पारंगतता है... ✍️
काव्याक्षरा
जून 07, 2024
ब्रह्मांड का वितान होता ही जा रहा है न जाने कब से और न जाने कब तक उसी तरह मानव की बुद्धि भी सीमाओं से परे हैं अलौकिक है…
काव्याक्षरा
जून 06, 2024
प्रेम वहाँ-वहाँ है जहाँ आशा की किरण दिखती है... फिर चाहे वो ईश्वर है व्यक्ति है वस्तु है स्थान है या कार्य है.....
काव्याक्षरा
जून 06, 2024
जीवन एक चुनौतीपूर्ण पहेली के समान है, तमाम उलझनें सुलझाने के बाद अक्सर इसके उसी हिस्से से गुज़रना पड़ता है जो सबसे आवश…