फैलाव...

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ब्रह्मांड का वितान
होता ही जा रहा है
न जाने कब से
और न जाने कब तक

उसी तरह
मानव की बुद्धि भी
सीमाओं से परे हैं अलौकिक है

एक खगोलीय घटना का अंश है
और दूसरा
उसके कारक परमात्मा का....
#kavyakshra 

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