मुख्यपृष्ठ फैलाव... फैलाव... Author - काव्याक्षरा जून 07, 2024 0 ब्रह्मांड का वितानहोता ही जा रहा हैन जाने कब सेऔर न जाने कब तकउसी तरहमानव की बुद्धि भीसीमाओं से परे हैं अलौकिक हैएक खगोलीय घटना का अंश हैऔर दूसराउसके कारक परमात्मा का....#kavyakshra Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने