मुख्यपृष्ठ मुसकान... मुसकान... Author - काव्याक्षरा जून 08, 2024 0 घंटों घूरते हैं लोगकिसी मुसकराते चेहरे कोतब भी यकीन नहीं किवे मुस्करा पाएँगे....सोचते हैं काश! कोई खुशी छलक जाएगीएक बूँद मुसकराहट से वो भी मुस्करा पाएँगे... ✍️#काव्याक्षरा Facebook Twitter Whatsapp और नया पुराने