कुछ काग़ज़...
मई 11, 2024
यूँ तो कागज़ की क्या अहमियत है हमारे लिए जब रद्दी के ढेर में तब्दील हो जाते हैं हर रोज़ मगर कुछ कागज़ रुला देते हैं…
काव्याक्षरा
मई 11, 2024
यूँ तो कागज़ की क्या अहमियत है हमारे लिए जब रद्दी के ढेर में तब्दील हो जाते हैं हर रोज़ मगर कुछ कागज़ रुला देते हैं…
काव्याक्षरा
मई 11, 2024
हम पिघलते जा रहे हैं नौकरी और घर की ऊष्माओं के मध्य जीवन मोम-सा हो चुका है इन सबमें तपकर किंतु चमक फिर भी शेष है..…
काव्याक्षरा
मई 11, 2024
तू और मैं कृतियाँ उसकी क्या भेद भला तुझमें मुझमें है.. सृष्टि के कण-कण में वो वो तुझमें है वो मुझमें है... ✍️ #kavyaksh…
काव्याक्षरा
मई 11, 2024
तू और मैं कृतियाँ उसकी क्या भेद भला तुझमें मुझमें है.. सृष्टि के कण-कण में वो वो तुझमें है वो मुझमें है... ✍️ #kavyaksh…
काव्याक्षरा
मई 03, 2024
जो बिछड़े हो तुम जल्दबाजी में मुझसे इतना तो सोचते तुम रूठ भी तो सकते थे... हर रास्ते को मोड़कर हर वास्ता तक…
काव्याक्षरा
अप्रैल 18, 2024
काव्याक्षरा
अप्रैल 15, 2024
अथाह आसमान हो सोच की उड़ान हो पंख विचारों के खुलें मन का-सा जहान हो शब्दों के ब्रह्मांड में अर्थ की पहचान हो अभिव्यक्…