नाराज़गी...

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जो बिछड़े हो तुम
जल्दबाजी में मुझसे
इतना तो सोचते
तुम रूठ भी तो सकते थे...

हर रास्ते को मोड़कर
हर वास्ता तक तोड़ लिया
शिकायत मुझसे जो थी
बोल भी तो सकते थे....

अपनी कही, न मेरी सुनी
हर बात पर जैसे अनबनी
गिरहें दिल की जो थी कभी
खोल भी तो सकते थे... 
#kavyakshra ✍️

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