खामियाँ....
मार्च 02, 2024
जब भी अपनी खासियतों की सूची पर इतराना चाहा सब की सब थी खामियाँ थी खासियत कोई नहीं.... 🦨
काव्याक्षरा
मार्च 02, 2024
जब भी अपनी खासियतों की सूची पर इतराना चाहा सब की सब थी खामियाँ थी खासियत कोई नहीं.... 🦨
काव्याक्षरा
मार्च 02, 2024
हम व्यस्त होते हैं तो हमपर गैरलाज़िम परेशानियाँ दस्तक नहीं देती वरना हम खुद कम है क्या फ़िज़ूल की बातों से अपने लि…
काव्याक्षरा
फ़रवरी 29, 2024
कितनी गहरी संवेदना रखा करती है कोई कविता कथ्य वही प्रस्तुति अनेक लोग भिन्न अनुभूति एक.... ✍️
काव्याक्षरा
फ़रवरी 29, 2024
काया की कोशिशें कहिए या इंद्रियों के इल्म... कुछ भी छू, देख-सुन नहीं सकते बगैर इनके हम... 🪴
काव्याक्षरा
फ़रवरी 28, 2024
जिन स्त्रियों का आचरण स्वाभिमान की चट्टान और व्यवहार मर्यादा के पाषाण-सा हुआ करता है वे अपनी संवेदनाओं को सदैव आवरण में…
काव्याक्षरा
जनवरी 27, 2024
पल दो पल को साथ बैठे तुम्हारे कुछ सुना कुछ कहा और चले गए दिल लगाने का मसला ही नहीं है हम किसी और के बेहद कर…
काव्याक्षरा
जनवरी 07, 2024
फर्क पड़ता है मुझे बहुत फर्क पड़ता है अक्लमंद होने से भी फ़कत क्या होता है अल्फ़ाज में ढाले गए हर एक लफ़्ज़ से जो रंग…