पल दो पल को साथ बैठे तुम्हारे
कुछ सुना कुछ कहा और चले गए
दिल लगाने का मसला ही नहीं है
हम किसी और के बेहद करीब हैं
अपने-से लगते होंगे तुम्हें मगर
न बातों के अपने मायने हैं खास
हम कोई अपने नहीं हैं तुम्हारे
हम किसी और का ज़हे-नसीब हैं... ✍️
~काव्याक्षरा
