हँसी के दुश्मन...
दिसंबर 25, 2023
हम जब छोटे बच्चे थे दिल खोलके हँसते थे खिलखिलाते रहते थे तो फूल झरते थे लोग तो तब भी चिढ़ते थे "इतना क्या हँसना त…
काव्याक्षरा
दिसंबर 25, 2023
हम जब छोटे बच्चे थे दिल खोलके हँसते थे खिलखिलाते रहते थे तो फूल झरते थे लोग तो तब भी चिढ़ते थे "इतना क्या हँसना त…
काव्याक्षरा
दिसंबर 25, 2023
तुम चुप बैठे रहोगे फासला बढ़ता जाएगा उपेक्षा करते रहोगे यकीन छूट जाएगा देखकर चले जाओगे क्या दिल भूल पाएगा नज़र न आना चा…
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2023
अगर अवसर मिले उनसे दिल की बात कहने का फिर से तो ये अवसर भी गँवा दीजिए छोड़िए भी ! आगे की सुध लीजिए..✍️ …
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2023
कब तक रहा जा सकता है तुम्हारे प्रेमपगे शब्दों से दूर तुम्हारे हृदय की अनुभूतियाँ और कुछ मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ पर्या…
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2023
कितनी गहरी संवेदनाएँ रखा करती हैं कविताएँ कथ्य वही प्रस्तुति अनेक लोग भिन्न अनुभूति एक... #kavyakshra
काव्याक्षरा
दिसंबर 18, 2023
चाहे तुम्हारा संदेश आए या आहट धड़कनें बेसाख्ता तेज़ हो जाती हैं जब #इंतज़ार होता है तुम्हारा तय रफ़्तार भी थम-सी जाती ह…
काव्याक्षरा
दिसंबर 14, 2023
मेरे श्रीमान जी की सुलझी हुई एक दृष्टि मुझे हर बार अनेक उलझनों से मुक्त रखती है मेरे सोचने भर की देर होती है कि तमाम उ…