दिल /दिमाग़
एक बार अक्ल ने
उसे भुलाना चाहा तो
दिल ने उसकी सौ दफ़ा
तस्वीर दिखा दी
ये मसला था दिल का
जिसको समझना मुश्किल
न सोचने की ज़िद ने
फिर याद दिला दी
जब भी दिमाग़ ने
उसे खारिज कर दिया
तभी दिल ने ख्यालों की
फ्रिक्वेंसी बढ़ा दी
ये जुनून बेहिसाब
और ख्याल बेवजह
उसे सोचने की लत ने
बाकायदा सज़ा दी
न फ़ासलों का ग़म
न मिलने की दरकार
किस एहसास ने फिर
उसूलों की नींव हिला दी...
