#कहिए_पतिदेव
अपरिमित प्रेम हृदय में लिए एक पत्नी पति से अपना कद छोटा होने को इस तरह से अभिव्यक्त कर रही है कि साबित हो जाता है कि कद प्रेम में कभी बाधा नहीं बनता , यही मेरी इस रचना का मूल भाव है -
कद छोटा है तुमसे मेरा
चाहे कांधे तक आती हूँ तुम्हारे
आलिंगन होने पर भी नहीं
चाहे छू पाती कभी गाल तुम्हारे
पर टिकता है सिर मेरा जब
जब सीने पर आकर तुम्हारे
होठों के कंपन से लेकर
प्रथम स्पर्श होने तक तुम्हारे
मस्तक चूम पाते हैं मेरा
तब अक्सर प्रेमिल होंठ तुम्हारे
आलिंगन हेतु जब मेरा
भार जो सहते पैर तुम्हारे
मिलन होता दृष्टि का मेरी
तब रसमय नेत्रों से तुम्हारे
अस्तित्व समा जाता है उसक्षण
हृदय का मेरे, हृदय में तुम्हारे..
#काव्याक्षरा
