कभी बादल कभी बारिश
कभी उम्मीद का झरना
तेरे #एहसास ने छूकर
मुझे क्या-क्या न बना डाला
हर लम्हा तुझे चाहा
नज़रे इनायत को तरसा
मुमकिन हो न पाया तो
तुझे आँखों में बसा डाला
तेरी बातों से तेरे नाम से
किस-किससे न किया इश्क
एक झलक देखने को
तुझे ख्वाबों में बुला डाला
तेरी आरज़ू जो की
मैंने गलती नहीं की थी
ये मसला था मेरे दिल का
तूने नाकाबिल बना डाला... ✍️
