कहिए पतिदेव

0
ऐसा इश्क जो हमें हर बार होते-होते रह जाता है...... 😌

"इश्क का ख्याल जो कि 
बाकमाल था 
नज़रों के मिलते ही 
कुछ मुमकिन हो गया.... 

एक ही तो पल में 
ये सिर चढ़कर बोला
और दूसरे ही पल 
फिर काफ़ूर हो गया..... 

अब नज़्म की शक्ल में 
जो सामने आया
तो इश्क मेरा लफ़्ज़ों से ही
मुकम्मल हो गया"

        मेरी इस शायरी के पीछे का वाकिया कुछ इस तरह से है कि जब कभी छुट्टी के दिन घर में काम-काज करते समय मैं और श्रीमान जी गलती से टकरा जाते हैं 😲
तो कुछ सैकेंड्स के लिए हमारी आँखें चार होती हैं! 🤩
      हम जैसे ही एक दूसरे के प्यार में पड़ने ही वाले होते हैं 😍 कि हमें तुरंत ही ये ख्याल आ जाता है कि
अरे! हम ये क्या सोचने लगे भई 😕 
हम तो पहले से ही शादीशुदा हैं 😏
      बस फिर उसी पल एक गहरी साँस के साथ चेहरे पर संजीदगी लिए 🤨
अनजाने बनकर घर-गृहस्थी के कामों में फिर से डूब जाते हैं! 🙄
      और ये कमबख़्त इश्क इसी तरह हर बार होते-होते रह जाता है.... 😒
#काव्याक्षरा

एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)