मनुष्य हो तो
पहचानना स्वयं को
और करना मनुष्यता का
पहले #चुनाव!
ऐसे अनुयायी न होना
कि पंथ के नियमों
में स्वविवेक को
कर लो भ्रष्ट!
इतने धार्मिक न होना
कि ईश्वर के लिए
निर्दोषों का बहाना
पड़ जाए रक्त!
इतने कट्टर न होना
कि घृणा के पैरों तले
कुचला जाए
कभी निश्छल प्रेम!
इतने देशभक्त न होना
कि असहाय के लिए
भूमि पर
न रख सको ध्वज!
मनुष्य हो तो
अनुभूति को जीवित रखना
और करना सदैव
कर्म श्रेष्ठ! ✍️
#काव्याक्षरा
