इश्क

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हर लिहाज़ से तुम दिल की
इशरत में बसी थी
हर ज़िक्र में एक वाहिद 
नाम तुम्हारा था.... 
क्यों कह न सके हम 
तुम से आरज़ू-ए-दिल 
तुम्हें दोस्ती के आगे 
 न इश्क गवारा था... 
#काव्याक्षरा

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