मर्म

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जन्म जन्मांतर की यात्राओं में
भटकता मन   
चाहता है पतंग-डोर सी
उडान आसमान की... 
मृत देहों पर पड़े पुष्प
गंधहीन होकर 
कचोटते हैं
जीवन के मर्म को...
#काव्याक्षरा 

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