#आँधी
दिसंबर 22, 2020
आँधियाँ बेसब्र थी सिरफ़िरी जुनूनी फिर बवंडर में उम्मीदें क्या वजूद रखती.... #kavyakshra
काव्याक्षरा
दिसंबर 22, 2020
आँधियाँ बेसब्र थी सिरफ़िरी जुनूनी फिर बवंडर में उम्मीदें क्या वजूद रखती.... #kavyakshra
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2020
***तरल विचार स्थिर नहीं रहते बह जाते हैं सोचने की प्रकिया के दौरान*** #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2020
विश्वास दरकने की तीव्रता दिखती नहीं सूक्ष्म रेखा से जीवन पानी सा बह जाता है... #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2020
विवश कहाँ है चंद्रमा आबद्ध है परिक्रमण में कौन जाने धरा से कब शपथ ली प्रणय में... #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 21, 2020
इश्क की आग में जलकर रोशन हो नहीं सकते ये दीया वो है जो बाती बगैर दिन रात जलता है... #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
***प्रेम में प्रतीक्षा का सर्वाधिक वर्चस्व है प्रतीक्षा में मिलन के प्रेम ही सर्वस्व है*** #काव्याक्षरा
काव्याक्षरा
दिसंबर 20, 2020
प्रतीक्षा में अंत की जीवन ही दुबारा मिला मुक्ति नहीं थी संभव यूँ जीवन के मोहपाश से जब मृत्यु को चाहा हमने जीवन ही उपहार…