उनका पत्र....

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जब आपसी वार्ता का
न तो चलन था 
न कोई प्रबंध

उस कालखंड में पत्र
हृदय के भावों का
संप्रेषण किया करते थे!

जब भी उधर से 
पत्र आता था
हम सैंकड़ों बार उसे पढ़कर

आत्मिक अनुभूति की
पुनरावृत्ति 
कर लिया करते थे... 😊
#kavyakshra 

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