विचारों की गरिमा...

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जीवनसाथी यूँ तो एक दूसरे के लिए 
संतोष से भरे होते हैं 
यानि जो मिल गया सो बढ़िया है

कुछ जीवनसाथी महत्त्वाकांक्षी होते हैं 
वो एक दूसरे को और बेहतर बना लेते हैं, 
संतोष से जीते हैं

अब बचे हुए कुछ, 
मात्र कुछ
ऐसे होते हैं जिनकी बेहतरी की तलाश 
मृगतृष्णा हो जाती है 
और वे भटकती आत्मा सा जीवन 
जीते रहते हैं! ✍️

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