ज़िंदगीऔरमैं

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ज़िंदगी की भागदौड़ में
हर रोज़ की जद्दोज़हद
इस हद तक
हावी हो जाती है कि
फिर कविता को

अपनी कविता को
सहेजकर तह में समेटकर
किसी अलमारी की
सबसे ऊँची ताक पर रख देना
ज्यादा सहज लगता है!
#kavyakshra 

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