मेरी गुज़ारिशों का उसपर
कोई असर नहीं दिखता
अब लहज़ा बदलकर देखूँगा
क्या तब भी नहीं वो मिलता...
मेरी #इल्तज़ा नकारकर
मुझे देखकर न देखा
अब मुँह मोड़कर मैं चल दूँगा
क्या तब भी नहीं वो मुड़ता
चाहत को दरकिनार किया
वो पत्थरदिल है शायद
अब एहसास बिखेर के रो दूँगा
क्या तब भी नहीं वो पिघलता
हर लम्हा उसकी चाहत का
इंतखाब किया इज़हार किया
अब चुप रहकर सब सह लूँगा
क्या तब भी नहीं वो बदलता...✍️
