#बुद्धपूर्णिमा
परिणाम को सोचकर
या मोह में बँधकर
अटल कठोर निर्णय
नहीं लिए जा सकते...
उस समय के घटनाक्रम
के संदर्भ में मात्र
दृढ़ इच्छाशक्ति की
महती भूमिका होती है...
फिर चाहे वह स्त्री हो
या हो कोई पुरुष
समाज तिरस्कृत करे
या करे महिमामंडित...
व्यक्ति विलासिता से
विरक्त हो चुका होता है
स्वबोधत्व से महात्मना
#बुद्ध हो चुका होता है ... ✍️
#काव्याक्षरा
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