#बेबाक_ज़िंदगी

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ज़िंदगी को हमने

स ऐश में गुज़ार दी

मनमौजियों की तरह
हसरतों पे वार दी…!!

नेकी हुई न हमसे
झूठे किए गुमान
दुश्वारियों ने जबकि
नसीहत हज़ार दी…!!

न ग़ुरूर होगा कुछ अब
असलियत सामने है
खिदमत में उसकी हमने
जब नकाबें उतार दी…!!

बाँटा है ग़म भी हमने
खुशियाँ भी जो तलाशी
गमग़ीन हैं जो दिल से
मुस्कराहट उधार दी... !!

फिसला जो व़क्त जागे
गफ़लत मिटी तमाम
उम्र के म़ुकाम पर कुछ
ग़लतियाँ सुधार दी… !!

#काव्याक्षरा 
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