#इश्क

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वो था एक अजनबी! 
मगर अपना-सा था 
उससे इश्क की ख्वाहिश 
तब सपना-सा था
अब है शामिल ज़िंदगी में
तो ख्वाहिश नहीं है कोई 
हकीकत हो जाए जो इश्क
फिर आज़माइश नहीं है कोई...
#काव्याक्षरा

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